Hinduism -हिन्दू धर्म (Part-1)

by RSP
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what is hindu dharm

हिंदू धर्म, एक अरब से अधिक लोगों का धर्म, दुनिया का सबसे पुराना धर्म है और सबसे अधिक है गैर-हिंदुओं को आश्चर्य चकित करने वाला धर्म । कुछ लोग कहते हैं कि यह धर्म भी नहीं है, जीवन व्यापन करने का एक तरीका है। हिंदु स्वयं इसे सनातन धर्म या सनातन परंपरा कहते हैं। तो हिंदू धर्म क्या है, हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना सक्रिय धर्म है। यह धर्म ईसा से भी पहले का धर्म है इस धर्म के बारे में जितना जानेंगे उतना कम है कुछ विद्वान कहते हैं यह कई और हजारों साल भी पीछे जा सकता है ,लेकिन हम बहुत गहरे तक नहीं जाएंगे अभी। चूंकि हिंदू धर्म में तिथियां बहुत विवादास्पद हैं। लेकिन एक बात निश्चित है। हिंदू धर्म पुराना है। हिंदू धर्म इतने लंबे समय से है कि इसे जानने के लिए कई वर्षों तक हमें निरंतर पढ़ाई करनी पड़ेगी  । हिंदू और भारत भी एक ही शब्द के लिए आते हैं। संस्कृत हिंदुओं की प्राचीन भाषा थी, और सिंधु नदी का संस्कृत नाम सिंधु है। सिंधु के पार बैठे प्राचीन फारसियों ने Sindhu  के S को H को बदल दिया। इसलिए सिंधु हिंदू बन गया। इसलिए नदी के उस पार रहने वाले लोग हिंदू बन गए। हिंदू धर्म का एक लंबा इतिहास रहा है। लेकिन आज हम सिर्फ मुख्य मान्यताओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे । हिंदू एक विविध समूह हैं। कुछ सख्त हैं, प्रार्थना के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। चीजों को समझने में आसान बनाने के लिए आइए हिंदू धर्म को  7 मुख्य मान्यताओं में विभाजित करें।

1. एक सार्वभौमिक आत्मा में विश्वास:

हिंदू एक सार्वभौमिक आत्मा को ब्रह्म के रूप में जानते हैं। एक निराकार  सभी वास्तविकता का स्रोत। हिंदू एक सार्वभौमिक आत्मा को ब्रह्म के रूप में जानते हैं। एक निराकार जो सभी प्रकार की वास्तविकता का स्रोत है । या सरल शब्दों में कहे तो हिन्दू धर्म ही अकेला धर्म है जो यह विश्वास के साथ कहता है कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर एक ऊर्जा होती है जो इस पुरे शरीर को संचालित करती है जिसे ब्रह्म की संज्ञा  दी गई है ब्रह्म से तात्पर्य है कि जो ऊर्जा मेरे भीतर है वही ऊर्जा आपके भीतर है हम सबके भीतर है अर्थार्त हम सब एक ही है हम अलग नहीं है हम सभी एक ही ऊर्जा से बने है

2. एक अमर आत्मा में विश्वास :

आत्मा क्या है जो हमारे भीतर ऊर्जा है उसी का दूसरा स्वरुप आत्मा है अब आप लोग यहाँ थोड़ा भ्रमित हो रहे होंगे कि ऊर्जा और आत्मा एक कैसे है तो मैं एक उदहारण देकर समझाता हूँ जैसे हम सभी के शरीर का डीएनए अलग अलग है वैसे ही आत्मा है अगर कोई व्यक्ति मरता है तो उसके पाप और पुण्य का हिसाब उसकी आत्मा द्वारा किया जाता है आप यहाँ पूछेंगे कि आत्मा से हिसाब कैसे होगा इसका उत्तर मैं आपको दूसरे आर्टिकल में दूंगा यहाँ देने लगा तो यह बहुत बड़ा हो जायेगा

3. कर्म में विश्वास:

कर्म वह क्रिया है, जो आमतौर पर समाज को प्रभावित करने वाली अच्छी या बुरी क्रिया होती है। कर्म वह क्रिया है जो आमतौर पर समाज को प्रभावित करने वाली अच्छी या बुरी क्रिया होती है। जैसे यदि आपके कर्म अच्छे नहीं हुए तो आपको सद्गति नहीं मिलेगी मतलब आपको स्वर्ग नहीं मिलेगा आपको नर्क कि यातनायें भोगनी होगी इसलिए हिन्दू धर्म हमेशा यही कहता आया है कि सिर्फ सद्कर्म करो ताकि अंत समय में आपका कल्याण हो ।

4. मोक्ष में विश्वास:

मोक्ष का मतलब है कि मनुष्य अपने जीवन चक्र से मुक्त हो जायेगा उसका फिर से जन्म नहीं होगा किसी भी योनि में नहीं होगा। मोक्ष एक ऐसी स्तिथि है जब मनुष्य हमेशा सत्कर्म करता है तो उसे मोक्ष मिलने कि सम्भावना बढ़ जाती है लेकिन उसने भूतकाल में अगर कोई जाने अनजाने में कोई अनुचित कार्य किया होगा तो उसको मोक्ष नहीं मिलेगा।

5. वेदों में विश्वास:

वेदों में हमेशा विश्वास रखो हमेशा इनमे लिखी बातो को मनो और अपने जीवन में उतारो हिन्दू धर्म में वेद ४ प्रकार है। जो अपने आप में बहुत विस्मय है। यदि आप इन बातों का अनुपालन करते है तो आप अपने जीवन को उच्चस्तर पर लेजा सकते है आज पूरा विश्व वेदों को पढ़कर अपने देश का उचित संचालन कर रहा है।

6. चक्रीय समय में विश्वास:

हिंदुओं के लिए कोई शुरुआत या अंत नहीं है। समय श्रृंखला है चक्रों का। प्रत्येक चक्र में चार युग या युग होते हैं: कृता, त्रेता, द्वापर, और काली। एक साथ जोड़ा गया, चारों युग कुल मिलाकर लगभग 4.32 मिलियन वर्ष हैं। प्रत्येक के अंत में मानव नैतिकता में गिरावट, वास्तविकता के कुल विनाश का कारण बनती है। हिंदू मानते है कि हम सभी ४ और अंतिम युग कलि में हैं। इसके बारे में एक बहुत अच्छा आर्टिकल लिखूंगा जिसमे आपको सब कुछ ज्ञात हो जायेगा कि चार युग कैसे होते है इन युगो में क्या क्या हुआ था और इनके क्या प्रमाण है

7. धर्म में विश्वास:

धर्म एक कठिन शब्द है। धर्म को “उचित व्यवहार” शब्द से अच्छे से समझ सकते है।धर्म एक जीवनशैली है जीवन-व्यवहार का तरीका है। ऋषियों  द्वारा सुझाया गया सात्विक जीवन-निर्वाह करने मार्ग है। सामाजिक जीवन को पवित्र एवं पापरहित बनाए रखने की युक्ति है। विचारवान ऋषियों द्वारा रचित नियमों को समझाइश लेकर लागू करने के प्रयत्न का एक नाम है। उचित-अनुचित के निर्णयन का एक पैमाना है और लोकहित के मार्ग पर चलने का प्रभावी परामर्श है।

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